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Best Hindi Poem - भारत का नागरिक

Today sharing best Hindi poem or adding one more interesting Hindi poem to our collection.भारत का नागरिक beautifully define by the poet. Hope that you will like this.

Best Hindi Poem - भारत का नागरिक

मैं भारत का नागरिक हूँ,*

*_मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिये।*

*-बिजली मैं बचाऊँगा नहीं,*
*_बिल मुझे माफ़ चाहिये ।*

*-पेड़ मैं लगाऊँगा नहीं,*
*_मौसम मुझको साफ़ चाहिये।*

Nrc and CAB Bill Poem in Hindi

Their is huge protest and confusion among people regarding the Nrc and CAB Bill. For this I am sharing short poem on this topic to put some light on the bill. Hope you will like.

Nrc and CAB Bill Poem in Hindi. I am sharing short poem on this topic to put some light on the bill. Hope you will like.


अगर यहीं के हो ,
 तो इतना "डर" कैसे,
मगर चोरी से घुसे हो,
 तो ये तुम्हारा "घर" कैसे??

अगर तुम "अमनपसंद" हो,
तो इतनी "गदर" कैसे?
जिसे खुद "खाक" कर रहे हो,
वो तुम्हारा "शहर" कैसे??

कल तक सिर्फ कोहरा था,
मेरे शहर की फ़िज़ा में,
आज़ नफरत का धुआं है,
तो सुहानी "सहर" (morning)कैसे?

Happy mothers Day Poem Hindi

मदर डे जिसको हिंदी मे मातृ दिवस कहा जाता है , यह दिवस हर साल मई महीने के दूसरे संडे को मनाया जाता है | Mothers Day माताओ के लिए बहुत ही खास होता है ,और इस पर्व को और खास बनाने  के लिए हम आज आपके साथ Happy Mothers Day Poem in Hindi   शेयर करने जा रहे है | इन कविताओं के साथ आप अपने विचार , भावनाये अपनी माँ के साथ वक़्त कर सकते है |

1. Happy Mothers Day Poem in Hindi

............माँ झूठ बोलती है...................
.सुबह जल्दी उठाने सात बजे को आठ कहती
 नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है ,
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती
 छोटी परेशानियों का बड़ा बवंडर करती है  ..........माँ बड़ा झूठ बोलती है

थाल भर खिलाकर तेरी भूख मर गयी कहती है
जो मैं न रहू घर पे तो मेरे पसंद की
कोई चीज़ रसोई में उनसे नही पकती है ,
मेरे मोटापे को भी कमजोरी की सूज़न बोलती है .........माँ बड़ा झूठ बोलती है

💥(तु खुद की खोज में निकल) 💥

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है

Hindi Poem -तु खुद की खोज में निकल , Best Hindi Poems


जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ
समझ न इनको वस्त्र तू
ये बेड़ियां पिघाल के
बना ले इनको शस्त्र तू
बना ले इनको शस्त्र तू
तू खुद की खोज में निकल

Hindi Poems - आज़ादी_चाहिए



#आज़ादी_चाहिए हमें पासबुक एंट्री करवाकर बैलेंस पूछने वालों से....

#आज़ादी_चाहिए हमें छुट्टी के दिन काम करने वालों से....

#आज़ादी_चाहिए हमें "15 अगस्त को भी बैंक खुलेगा क्या ? " पूछने वालों से.....

#आजादी_चाहिए हमे जो देखते ही पूछते है - और बेटा! बैंक में तो मज़े कर रहे हो पूछने वाले रिश्तेदारों से......

#आज़ादी_चाहिए हमें एन टाइम पर लीव रिजेक्ट करने वालों से.....

Condolence message - Atal bihari vajpayee | Hindi Poem

Deeply saddened by the demise of Indian former PM Shri Atal Bihari Vajpayee jee. Heartily condolence to his family and Nation.He was a great leader with a great sense of compassion and humor. He will be remembered fondly by a vast number of us.

*मौत से ठन गई!*
*( श्री अटल बिहारी वाजपेई)*
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

Hindi Poems| Collection |Kavita |Famous Hindi Poetry


 1. Funny Hindi Poems - Man / woman wisdom
हास्य कवि शशिकान्त पान्डेय द्वारा लिखा :एक व्यंग्य ;
👌👌👌👌👌👌
अक्ल बाटने लगे विधाता,
लंबी लगी कतारें ।
सभी आदमी खड़े हुए थे,
कहीं नहीं थी नारी ।
👬👬👬👬👬
सभी नारियाँ कहाँ रह गई.
था ये अचरज भारी ।
पता चला ब्यूटी पार्लर में,
पहुँच गई थी सारी।
💆💇💅💆💇💅
मेकअप की थी गहन प्रक्रिया,
एक एक पर भारी ।
बैठी थीं कुछ इंतजार में,
कब आएगी बारी ।
🙇🙇🙇🙇🙇🙇
उधर विधाता ने पुरूषों में,
अक्ल बाँट दी सारी ।
ब्यूटी पार्लर से फुर्सत पाकर,
जब पहुँची सब नारी ।
👭👭👭👭👭
बोर्ड लगा था स्टॉक ख़त्म है,
नहीं अक्ल अब बाकी ।
रोने लगी सभी महिलाएं ,
नींद खुली ब्रह्मा की ।
😴😴😴😴😴😴

Hindi Poem: Real Kasmir Story



काश्मीर जो खुद सूरज के बेटे की रजधानी था
डमरू वाले शिव शंकर की जो घाटी कल्याणी था
काश्मीर जो इस धरती का स्वर्ग बताया जाता था
जिस मिट्टी को दुनिया भर में अर्ध्य चढ़ाया जाता था
काश्मीर जो भारतमाता की आँखों का तारा था
काश्मीर जो लालबहादुर को प्राणों से प्यारा था
काश्मीर वो डूब गया है अंधी-गहरी खाई में
फूलों की खुशबू रोती है मरघट की तन्हाई में

ये अग्नीगंधा मौसम की बेला है
गंधों के घर बंदूकों का मेला है
मैं भारत की जनता का संबोधन हूँ
आँसू के अधिकारों का उदबोधन हूँ
मैं अभिधा की परम्परा का चारण हूँ
आजादी की पीड़ा का उच्चारण हूँ

इसीलिए दरबारों को दर्पण दिखलाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

बस नारों में गाते रहियेगा कश्मीर हमारा है
छू कर तो देखो हिम छोटी के नीचे अंगारा है
दिल्ली अपना चेहरा देखे धूल हटाकर दर्पण की
दरबारों की तस्वीरें भी हैं बेशर्म समर्पण की

Bachpan wali diwali 

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हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं
चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं
अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस  पाते हैं
दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं  ....


दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं 
चवन्नी -अठन्नी  पटाखों के लिए बचाते हैं
सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं
सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....


बिजली की झालर छत से लटकाते हैं
कुछ में मास्टर  बल्ब भी  लगाते हैं
टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं
दो-चार बिजली के झटके भी  खाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....


दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है
मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है
दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं
बार-बार बस गिनते जाते है
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....


धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है
छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं
मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं
प्रसाद की  थाली   पड़ोस में  देने जाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....


माँ से खील में से  धान बिनवाते हैं 
खांड  के खिलोने के साथ उसे जमके खाते है 
अन्नकूट के लिए सब्जियों का ढेर लगाते है 
भैया-दूज के दिन दीदी से आशीर्वाद पाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....


दिवाली बीत जाने पे दुखी हो जाते हैं  
कुछ न फूटे पटाखों का बारूद जलाते हैं 
घर की छत पे दगे हुए राकेट पाते हैं 
बुझे दीयों को मुंडेर से हटाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....


बूढ़े माँ-बाप का एकाकीपन मिटाते हैं 
वहीँ पुरानी रौनक फिर से लाते हैं 
सामान  से नहीं ,समय देकर सम्मान  जताते हैं
उनके पुराने सुने किस्से फिर से सुनते जाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

2. Sweet Happy Diwali Poem


खुशियों में सभी रंग जाये ,आओ ऐसे मनायें दीवाली |
चंदा भी धरा पर जाये ,आओ ऐसे मनायें दीवाली ||

बहुत जलाये दीप सभी ने ,मिटा ना अब तक अंधियारा |
गले मिले हर साल मगर ,ना मिला दिलों का गलियारा ||
 नेह की चिंगारी से जला दें ,दुश्मनी जो बरसों से पाली |
खुशियों में सभी रंग जाये , आओ ऐसे मनायें दीवाली ||

धन दौलत की चमक धमक में हमने खोया अपनों को |
लक्ष्मी को पूजा लेकिन ना मान दिया गृहलक्ष्मी को ||
दो पल सोचो आखिर क्या, हम सबसे कहती दीवाली |
खुशियों में सभी रंग जाये आओ ऐसे मनायें दीवाली ||

3.Sweet Happy Diwali Poem

आज रात चाँद इक महफ़िल में छा गया
धुन तो नहीं थी कोई मगर गीत गा गया

रोशनी में रोशनी दिखती नहीं मगर
दीपक जलें अनेक तो रामराज्य गया

अपने ही हाथों में है अपनी ही आबरू
कह-कह के और भी कई कहकहे लगा गया

जानते हो, बूझते हो, फिर सवाल क्यूँ 
कौन था वो कौन था जो मुझको भा गया

हम सब लगे हैं खोज में अपने ही चाँद की
हम सब की राह में कोई अलख जगा गया